सोमवार, 14 जून 2021

गांव की यादें शायरी | Village Quotes in Hindi


क्या आपको भी अपने गाँव की याद आती है? अगर हाँ तो आप इस पोस्ट में गाँव पर शायरी, Village Quotes in Hindi, गाँव पर स्टेटस आदि पढ़ सकते हैं और इन शायरियों को आप सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं।  

आजकल लोग सुख-सुविधाओं और पैसे के लिए शहर में रहना पसंद करते हैं लेकिन सच बात तो यह है की जिंदगी में शुकून अगर कहीं है तो वह गाँव में ही है। गाँव में शुकून-शांति तो होती ही है साथ ही गाँव के लोग एक परिवार की तरह रहते हैं। गाँव छोड़ शहर में बसने वालों को भी अपने गाँव की याद जरुर आती है। आइये गाँव पर लिखी गयी कुछ शायरियां पढ़ते हैं। 

गांव की यादें शायरी

gaon ki yaade shayari


शहर की हलचल से दूर
यहाँ मन को आराम है
घर तो अपना गाव में ही है जनाब
शहर में तो बस मकान है।

गाँव की प्यारी यादों को दिल में सजाया करो,
शहर में तरक्की कितनी भी करो लो
पर गाँव अपनों से मिलने आया करो


होती होंगी शहरों की शामे रंगीन,
मेरे गांव की रातों में सुकून है।


ख़ुशी से कब हम अपना गाँव छोड़कर आते है,
पैसे कमाने के लिए अपने दिल को तोड़कर आते है.


बड़ा ही खुश हो जाता हूँ जब कोई मेरे गाँव से आता है,
जैसे वो कोई मरहम मेरे दिल के घाव का लाता है.


गाँव नाप आते थे पूरा नंगे पाँव,
पैर जलने लगे जबसे डिग्री सेल्सियस समझ आया।


अपनेपन और सुकून की छांव,
हम सबका अपना – अपना गांव।


गांवों में भीड़ बढ़ती जा रही है,
सुना है शहर में कोई बीमारी आयी है!!

गाँव की यादें शायरी 

सहर की गर्मी में वो छांव याद आता है,
मस्ती में बिता जहाँ बचपन वो गाँव याद आता है।


दिल खुश हो जाता है गाँव के मेले में,
ख़ुशी का पता ही नही शहर के झमेले में.


गाँव में चलती है कितनी हसीन हवाएं,
दम हो तो कोई इस तरह का मशीन बनाएं.


यूँ तो समेट लाए हर चीज़ गाँव से मगर,
धागे तुम्हारे नाम के बरग़द पे ही रह गए


क्या शहर क्या गांव, सब बदलने लगे...
एक घर में कई चूल्हे जलने लगे...!!


बेशक आराम की जिंदगी सहरों में मिल जाएगी
मगर सुकून बस गाँव में ही आएगी।


गाँव में त्यौहार, त्यौहार सा लगता है
जब पूरा गाँव एक परिवार सा लगता है।

Village Quotes in Hindi

सुना है.. खरीद लिया उसने करोड़ों का घर शहर में ..
मगर आंगन दिखाने आज भी वो बच्चो को गांव लाता है


गांव में जान अब भी है
रूतबा और शान अब भी है !!


मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई 
- कैफ़ी आज़मी


जहां कुदरत की अपनी छांव है,
जिसे अपना कह सकूं वह अपना गांव है!

गाँव की याद शायरी 

जब जलाती है ये धूप, बरगद का छाँव याद आता है,
और
जब आसरा छीन लेता है ये शहर, तब मेरा गांव याद आता है।


ग़रीबी में भी अपने बच्चे को अच्छा संस्कार देना,
दुनिया में कही भी रहो गाँव की मिट्टी को प्यार देना.


ऐ गाँव !
ये कैसी शान और अदा है तेरी
जो एक बार आते हैं, तेरे मुरीद हो जाते हैं


मां ने अपने दर्द भरे खत में लिखा
सड़कें पक्की हैं अब तो गांव आया कर


पूरी दुनिया से थक हार के एक गाँव ही
तो था जाह में चैन से मर सकता था।


गाँव में जब भूख सताता है,
तो शहर का रास्ता नजर आता है,
वो हर तरह के दर्द को सह लेता है
जब घर की याद आये तो अकेले में रो लेता है

मेरे गाँव की यादें शायरी 


कहीं दिखती नहीं तितलियां शहर में,
वहीं जाड़े की धूप खिलखिला के आती है मेरे गांव में..


मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट
मेरा नादान गाँव अब भी उलझा है कर्ज की किश्तों में


ख़ोल चेहरों पे चढ़ाने नहीं आते हमको
गांव के लोग हैं हम शहर में कम आते हैं
-बेदिल हैदरी


शहरों में कहां मिलता है वो सुकून जो गांव में था,
जो मां की गोदी और नीम पीपल की छांव में था
-डॉ सुलक्षणा अहलावत


नैनों में था रास्ता, हृदय में था गांव
हुई न पूरी यात्रा, छलनी हो गए पांव
-निदा फ़ाज़ली


यूं खुद की लाश अपने कांधे पर उठाये हैं
ऐ शहर के वाशिंदों ! हम गाँव से आये हैं
-अदम गोंडवी

और पढ़ें:


Comments

You can post your own Shayri in comment box.
EmoticonEmoticon