गुरुवार, 1 जनवरी 2015

तेरी ‪‎डोली‬ उठी मेरी ‪‎मैय्यत‬ :Sad Shayri in Hindi


तेरी ‪‎डोली‬ उठी, मेरी ‪‎मैय्यत‬ उठी;
‪‎फूल तुझ‬ पर भी  बरसे, ‪‎फूल मुझ‬ पर भी बरसे‬;
‪‎ ‪‎तू सज‬ गई,
मुझे भी सजाया‬ गया;
तू‬ भी घर‬ को चली‬, ‪‎मैं‬ भी घर को ‪‎चला‬;
फर्क सिर्फ इतना सा था,

तू उठ‬ के
गई‬, ‪‎मुझे उठाया‬ गया;
महफिल वहां‬ भी थी, ‪‎लोग यहां‬ भी थे;
फर्क सिर्फ इतना सा था, उनका हंसना वहां,
इनका रोना यहां‬;
काजी उधर‬ भी था, ‪‎मौलवी इधर‬ भी था;
‪‎दो बोल तेरे‬ पढ़े, दो बोल मेरे‬ पढ़े;
तेरा निकाह पढ़ा
मेरा जनाजा पढ़ा;
फर्क सिर्फ इतना सा था, तुझे अपनाया गया, मुझे दफनाया गया !
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